अब तो ठीक होकर घर जाना है

लखनऊ : कोरोना अस्पताल और क्वारंटाइन सेंटर में खाने-पीने, साफ-सफाई से इंतज़ाम को लेकर लोगों के मन में तमाम शंकाए है। इन्ही शंकाओं के कारण लोग अक्सर कोरोना के लक्षण छिपाते है। सीएमओ हेल्प लाइन से संपर्क नहीं करते, लेकिन हकीकत इससे उलट है। काम से काम केजीएमयू कोविड वार्ड की तो है ही। इसकी तस्दीक की मेडिकल यूनिवर्सिटी में भर्ती कोरोना संक्रमित नवल कांत सिन्हा ने।

उन्होंने कहा ” मैं केजीएमयू के कोरोना वार्ड में भर्ती हूँ। शुक्रवार शाम 7:00 बजे का वक्त हो कर चला है। गुरुवार सुबह पता चला कि मुझे संक्रमण हो चुका है। घर पर ही था। डिप्टी सीएमओ का फोन आया। लक्षणों की जानकारी ली और बताया कि आपको एडमिट होना पड़ेगा। शाम को सरकारी एंबुलेंस आई और मुझे केजीएमयू के कोविड वार्ड में भर्ती करवा दिया गया। बेड पर यूज एंड थ्रो वाली चादर और तकिया के गिलाफ है। पानी मांगा तो वार्ड बॉय पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर की 2 बोतलें दे गया। थोड़ी ही देर में चाय और एक ब्रांडेड नमकीन दी गई। उसके बाद डॉक्टर का फोन आया। मेरी पूरी मेडिकल हिस्ट्री पूछी। थोड़ी देर बाद डॉक्टर का राउंड हुआ। वह बेड से थोड़ी दूरी पर रुक गए। उन्होंने बताया कि आपको लक्षणविहीन कोरोना संक्रमण है यानी आप सिम्पटोमैटिक हैं। 80 फ़ीसदी केस ऐसे ही हैं। घबराने की जरूरत नहीं आप जल्द ही ठीक हो जाएंगे। डॉक्टरों की बातों से तसल्ली हुई। करोना कि कोई सटीक दवा तो है नहीं डॉक्टर लक्षणों के आधार पर इलाज करते हैं। ऐसे में पूरी लड़ाई आपके हौसले पर निर्भर करती है। बाकी मदद के लिए डॉक्टर और अन्य मेडिकल स्टाफ की है ही।”

वार्ड के अंदर नहीं है खौफ

न्यूरोलॉजी विभाग के संक्रामक रोग विभाग की एंट्री पर बड़ा सा बोर्ड लगा हुआ है “कोरोना वार्ड”। सामान्य लोग वार्ड के सामने से गुजरने से भी कतराते है पर वार्ड के अंदर का माहौल अलग है। वजह है वार्ड के अंदर जो है संक्रमित है। अब उन्हें ठीक होना है। संक्रमित होने का डर तो बचा नहीं।

खान भी जायकेदार

मुझे उम्मीद थी कि डिनर में मरीजों को दिये जाने वाला उबला खाना मिलेगा। करीब 8 खाने की थाली साइड टेबल पर रख गई। थाली सैलोफिन पेपर से ढकी थी। थाली में रोटी,चावल,पनीर की सब्जी,मिक्स वेज, दाल मखनी, सलाद,अचार, चटनी और मीठा दही था। खाना परहेजी नहीं ज़ायकेदार था।

यात्रा से गुजर कर सुरक्षित घर जाना है

विभाग के प्रमुख डॉ. डी हिमांशु मरीजों के मनोवैज्ञानिक पहलू पर खासा जोर देते है। डॉ. सूर्यकांत का कहना है, दरसल यह इलाज एक कोरोना यात्रा है और अभी बहुत लोगों को इस यात्रा से गुजरकर सुरक्षित अपने घर जाना है .

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