महिला पत्रकार को धमकाया और डराया गया

महिला पत्रकार को धमकाया और डराया गया
तमन्ना अंजुम

पुरुष प्रधान समाज में अगर कोई महिला नेतृत्व में भागीदारी की बात करें तो हमारे समाज में आज भी फटी सोच रखने वाले महिला को आगे आने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास करते है और कुछ ऐसा ही मेरे साथ हुआ।

उत्तर प्रदेश के मुख्यालय मान्यता प्राप्त पत्रकारों के की तादाद में महिला पत्रकारों की मान्यता नही देने का एक चलन बना हुआ है और महिलाओं के साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है।

इन सब बातों को देखकर मेरे द्वारा यह निर्णय लिया गया कि मान्यता समिति के चुनाव में भाग लेकर एक सशक्त नेतृत्व समिति को दिया जाएगा और जिस तरह से महिलाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है उनकी समस्याओं को मुखरता से शासन के सम्मुख लाया जाएगा।

विधानसभा, लोकभवन, और प्रेस रूम में जिन लोगों द्वारा अभद्र और अश्लील अल्फाजों का बेजा इस्तेमाल किया जाता है ऐसे लोगों को प्रेस रूम से बाहर निकाला जाएगा और सभी जगहों पर महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, लेकिन मेरे विचार, मेरी यह सोच पुरुष प्रधान मान्यता समिति के चंद लोगों को रास नहीं आया और उत्तर प्रदेश के विधानसभा के प्रेस रूम में मेरे साथ जो व्यवहार किया गया वह न सिर्फ निंदनीय है, अशोभनीय है, शर्मनाक है बल्कि महिलाओं के प्रति इनकी दूषित मानसिकता को दर्शाता है।

माननीय योगी जी ने अपने 4 साल के कार्यकाल में महिलाओं के सम्मान और उनके स्वाभिमान की बात को दोहराया है लेकिन उत्तर प्रदेश विधानसभा के प्रेस रूम में बुद्धिजीवी वर्ग के कुंठित मानसिकता के लोगों में जो दुर्व्यवहार मेरे साथ किया वो माफी के लायक नही है।

एक तरफ मेरे मनोबल को तोड़ने की कोशिश की और फिर इसके बाद आयोग के लोगों ने चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों के सम्मुख माफी मांग कर जो स्वांग रचा उससे मेरा उपहास बना दिया गया है जो मुझे अंदर से आहत कर गया। एक गहरा दर्द दे गया और मेरी भावनाओं को जरूर तोड़ गया है लेकिन मेरे हौसलों को नहीं तोड़ पाया है।  आयोग के माफीनामे की गवाही देता उत्तर प्रदेश शासन के सरकारी लोगो(logo) के सामने खड़े आयोग ने हाथ जोड़ कर माफी तो मांगी लेकिन उनकी मंशा दिख गयी।

फिलहाल ऐसे चुनाव आयोग के सामने निष्पक्षता से चुनाव होगा यह भी एक बड़ा संदेह है। चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ सदस्य जिस तरह से गाली गलौज और अभद्र भाषा का प्रयोग कर अपने बहादुरी के किस्से सुनाते हैं उससे आम पत्रकारों में एक दहशत का माहौल भले ही होगा लेकिन ना मुझे वो डरा सकते हैं, ना डिगा सकते हैं, ना मेरे संकल्प से मुझे हटा सकते हैं।

मैं नारी जरूर हूं लेकिन मेरे हौसलों को वह मिटा नहीं सकते हैं और अपने इन्हीं हौसलों की जोर आजमाइश के लिए मैं आगे निरंतर प्रयास करती रहूंगी लेकिन जब इस चुनाव में आयोग ही संदेह के घेरे में हो तो निष्पक्षता की उम्मीद नहीं की जा सकती इसलिए मैं इस चुनाव में भाग न लेने का निर्णय करती हूं और आप सभी से अपील करती हूं कि कृपया अपना वोट उनको दें जो आपकी बात को बहादुरी से शासन के सामने रख सके और ऐसे अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वालों को आइना दिखा सके।

आयोग में चुनाव प्रवेक्षक सुरेश बहादुर जी ने जो दादागिरी दिखाई है उससे परिलक्षित है कि भविष्य में वह मेरे साथ कुछ भी कर सकते हैं।मेरी हत्या भी करा सकते हैं।इस सम्बन्ध में मै जल्दी ही माननीय मुख्यमंत्री जी,माननीय विधान सभा अध्यक्ष जी और माननीय राज्यपाल महोदय से भी मिलूंगी।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और महिला आयोग के सामने इस पूरे प्रकरण रखूंगी
आप सभी का सादर अभिवादन है। –तमन्ना अंजुम

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