फिक्की फ्लो ने आयोजित किया कार्यक्रम, “इन कवर्स विद सुधा मूर्ति”

लखनऊ,15 मई। फिक्की फ्लो के लखनऊ चैप्टर आज एक कार्यक्रम, “इन कवर्स विद सुधा मूर्ति” का आयोजन किया। यह कार्यक्रम सभी पूरे देश के फ्लो सदस्यों और लखनऊ शहर के अन्य मेहमानों के लिए खुला मंच था जो इस बहुप्रतीक्षित बातचीत के लिए आमंत्रित थे।

सुधा मूर्ति एक ऐसा नाम है जिसे किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है, फिर भी, उनकी शानदार उपलब्धियों के बारे में यह लिखा जा सकता है। कि वह एक असाधारण महिला है और उनके शानदार कैरियर में कई बातें ऐसी है जिसे उनके द्वारा पहली बार करने का श्रेय दिया जाता है। वह इन्फोसिस फाउंडेशन की चेयरपर्सन हैं जिसने पिछले 23 वर्षों में 13 राष्ट्रीय आपदाओं को संभाला है। एक परोपकारी, व दृढ़ता से सामाजिक कारणों के लिए जागरूकता पैदा करने में विश्वास करती है और इस दृष्टि के अथक खोज के लिए पूरी दुनिया की यात्रा की है। अंग्रेजी और कन्नड़ में एक प्रसिद्ध और लोकप्रिय लेखक, उनकी पुस्तकों का सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया गया है और 26 लाख से अधिक किताबें बिक चुकी हैं।

उन्हें सात मानद डॉक्टरेट उपाधि प्रदान की गयी हैं और उन्हें कई पुरस्कारों से विभूषित किया गया है जिसमे 2006 में प्रतिष्ठित पद्म श्री और क्रॉसवर्ड बुक अवार्ड्स 2018 द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट मुख्य हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुधा मूर्ति ने कहा की जीवन में बड़ा करने के लिए आपको अपनी जरूरतों की लक्ष्मण रेखा खींचनी पड़ेगी जब वह जरूरतें पूरी हो जाए तो भी कठिन परिश्रम जारी रखें और जरूरत से ऊपर के धन को समाज के उत्तरोत्तर विकास में लगाएं गरीबों की सेवा करें उनके लिए रोजगार के अवसर पैदा करें। उनकी शिक्षा में अपना योगदान दें। उनका मानना है कि कुछ भी असंभव नहीं है यदि आप अपने मन के विश्वास को अडिग रखें और यदि आप ऐसा करने में सफल होते हैं जीवन की हर चीज को आप प्राप्त कर सकते हैं। कोविड-19 की वैश्विक महामारी के बारे में चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह वह समय है जब हम अपने अंदर की दृढ़ इच्छाशक्ति को मजबूत करके लोगों की सहायता करें और साथ ही अपने परिवार की भी सहायता करें आज जो वर्किंग वूमेन हैं वह भी अपने घरों पर बैठी हैं लेकिन वह घर में बैठकर भी परोपकार के अन्य साधनों का प्रयोग कर सकती हैं।

अपने लेखन के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि उनका लेखन उनकी माँ के मार्गदर्शन में 8-9 वर्ष की उम्र में शुरू हुआ। उन्होंने एक बच्चे के रूप में निबंध और लघु कथाओं के लिए कई पुरस्कार जीते। बाद में, हाई स्कूल में एक पेपर ने मोर्टज़ार्ट पर अपनी रचना प्रकाशित की। उनकी अधिकांश कहानियाँ व्यक्तिगत अनुभवों या यात्रा में प्रेरणाएँ पाती हैं।

इस कार्यक्रम में शामिल होने वालों में देश भर के फिक्की फ्लो के सदस्यों के अलावा फिक्की फ्लो की राष्ट्रीय अध्य्क्ष जाहन्वी फुकन भी शामिल थी।

इस पूरे कार्यक्रम को पूजा गर्ग, अध्यक्ष,फ्लो लखनऊ अध्याय और मंजरी मिश्रा द्वारा एक टॉक शो की तरह संचालित किया गया।
बातचीत श्रीमती सुधा मूर्ति के जीवन के विभिन्न पहलुओं को कवर किया है, जिसमे जल्दी पेशेवर कैरियरमें आने उसके परिवार के जीवन, किताबें, उसके पात्रों के लिए अपनी प्रेरणाओं के प्रति अपने प्यार और उसके अन्य लोगों से सीखने के बारे में विस्तृत चर्चा की गई।

इस अवसर पर लखनऊ चैप्टर की अध्य्क्ष पूजा गर्ग ने कहा कि “सुधा जी की सादगी, उनकी बालसुलभ मुस्कान और जिज्ञासा और उनकी टिमटिमाहट भरी आँखों के पीछे की असीम बुद्धिमत्ता ने हमारे दिलों को जीत लिया। आज उनके साथ साझा किए गए उनके जीवन के सबक आने वाले वर्षों तक हमारे साथ रहेंगे।” ।

Show More

Related Articles