कानपुर: ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचने लगा सीवेज, अब टैनरियां खुलने का इंतजार

कानपुर : नैशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (एनजीटी) के आदेश पर अक्टूबर में बंद की गईं कानपुर की चमड़ा टैनरियों के दोबारा खुलने का समय नजदीक आता लग रहा है। जल निगम ने कंबाइंड एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) तक घरेलू सीवेज पहुंचाने वाली 2204 मीटर लंबी लाइन चालू कर दी है। गंगा प्रदूषण इकाई के महाप्रबंधक के अनुसार, जल निगम ने 22 नवंबर की रात से सिस्टम ‘ओके’ कर दिया है। अब बाकी एजेंसियां टैनरियों को खोलने पर फैसला करेंगी।

एक साल से जारी बंदी

प्रयागराज कुंभ के पहले नवंबर-2018 से ही कानपुर की चमड़ा फैक्ट्रियां कभी पूर्ण तो कभी आंशिक बंदी से कराहती रहीं। मार्च के पहले हफ्ते में कुंभ खत्म होने के बाद भी टैनरियां नहीं खुलीं तो फैक्ट्री मालिक और कर्मचारी हताश हो गए। मई में फैक्ट्रियों की बिजली काटे जाने पर पुलिस और मजदूरों के बीच जोरदार भिड़ंत भी हुई थी। अगस्त में आधी क्षमता पर टैनरियों को खोलने का फरमान सुनाया गया।

कुछ दिन बाद ही राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की एक टीम ने प्लांट का निरीक्षण किया। जांच में पता चला कि टैनरियों के उत्प्रवाह को घोलने वाला घरेलू सीवेज प्लांट तक नहीं पहुंच रहा है। इस तकनीकी दिक्कत के कारण टैनरियों को काम बंद करने का आदेश सुना दिया गया। अक्टूबर के पहले हफ्ते से यह आदेश प्रभावी हो गया। इस बीच कई टैनरियों पर नियमों के उल्लंघन में करोड़ों रुपये का जुर्माना भी कुछ दिन पहले लगाया गया है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेश का इंतजार

जल निगम ने शुक्रवार देर रात घरेलू सीवेज चैनल को चालू कर दिया। इसके बाद सारा दारोमदार यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर है। टैनर्स इस मामले में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। वे टैनरियों को चालू करने के बोर्ड के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। एक फैक्ट्री मालिक के अनुसार, टैनरियां चालू भी हो गईं तो जनवरी-फरवरी में माघ मेले के कारण फिर से बंदी का आदेश आ जाएगा। इसलिए कुछ भी उम्मीद करना बेमानी है। वहीं, काफी कोशिशों के बावजूद यूपीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी एसबी फ्रैंकलिन से बात नहीं हो सकी।

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