बदहवाल अर्थव्यवस्था मगर प्रधानमंत्री का फोकस अनुच्छेद 370 को भुनाने में

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने के फैसले को सरदार पटेल को समर्पित करते हुए कहा अनुच्छेद 370 से अलगाववाद की दीवार खडी हो गई, जिसे हमने गिरा दिया है।प्रधानमंत्री जी अब अनुच्छेद 370 का राग अलापना बंद कर देश की बदहवाल अर्थव्यवस्था की तरफ ध्यान दें तो बेहतर होगा।

आपकी सरकार ने हीं जो डाटा जारी किया है उसमें कहा गया है कि कोर सेक्टर के उत्पादन में 5.2% की गिरावट दर्ज की गई है।आठ में से सात सेक्टर में निगेटिव ग्रोथ दर्ज की गई है।यह गिरावट कोयले,कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस,रिफाइनरी उत्पादों, सीमेंट, स्टील और बिजली जैसे सेक्टर्स में दर्ज की गई है जो देश की अर्थव्यवस्था की भयावहता को प्रर्दशित कर रही है।

कोल माइनिंग सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट देखी जा रही है जिसकी वजह से अन्य सेक्टर भी प्रभावित हो रहें हैं।उत्पादन क्षेत्र में कोयले की कीमत बढ़ने या घटने पर वह सेक्टर प्रभावित होता है जो अभी दिख रहा है।पिछले साल 2018 के सितंबर महीने में कोल माइनिंग सेक्टर में -8.6% की गिरावट दर्ज की गई थी जो कि इस साल सितंबर में घटकर -20.5% हो गई है।

जीडीपी सरकार की विश्वसनीयता की तरह लगातार गिर रही है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर घटकर छह सालों के निचले स्तर 5% पर आ गई है।सरकार ने सुस्त अर्थव्यवस्था में जान डालने के लिए बीते दिनों कई फैसले लिए हैं जिनमें काँरपोरेट टैक्स में कटौती, लोन मेले का आयोजन, बैंकों का विलय आदि आदि मगर सरकार के इन कदमों से सुस्त अर्थव्यवस्था की कछुआ चाल खरगोश के दौड में तब्दील होती कहीं नहीं दिखती।

आजादी के बाद की सबसे नाकाम वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को धार्मिक और आध्यात्मिक नेताओं के स्वंय सहायता समूह की प्रशंसा करते हुए बैंकों से कहा है कि वे ऐसे समूहों को ऋण देने में नहीं हिचकें क्योंकि ये समूह विश्वसनीय नेतृत्व द्वारा चलाए जाते हैं।वित्तमंत्री जी अब यही धार्मिक और आध्यात्मिक समूह देश की अर्थव्यवस्था का बेडा पार लगाएगा।

अगर यहाँ एकाउंट एनपीए हो जाता है तो इसमें पाकिस्तान की साजिश खोजी जाएगी।आप लोन मेले का आयोजन कर उन गरीबों को ऋण बांट रहें हैं जो वापस आने वाला नहीं है।जो गरीब दो जून की रोटी का मोहताज है वो कैसे बैंक का लोन अदा करेगा ये सोचनीय विषय है।एक तरफ अर्थव्यवस्था बदहवास है दूसरी तरफ बैंकों के ऊपर दवाब डाला जा रहा है कि वे हर पखवारे लोन मेला आयोजित कर गरीबों को ऋण मंजूर करें।

प्रधानमंत्री जी आपकी पढाई और अर्थव्यवस्था पर आपकी समझ को तो पूरा देश जानता है, अब आप लोग अपनी सनक से बैंकिंग सेक्टर को भी तबाह करने पर तूले हैं या बहुत हद तक तबाह हो चुके हैं।बडे बडे डिफॉल्टर बैंक का पैसा लेकर विदेश भाग जाते हैं या भगा दिए जातें हैं सरकार कुछ नहीं कर पाती।पत्रकारों के सवाल उठाने पर सरकार और भक्त मीडिया इसे कांग्रेस की करतूत बताकर पल्ला झाड़ लेती है मगर दक्ष प्रश्न ये है कि इस तरह कब तक चलेगा।

कब तक पाकिस्तान और मुसलमान की आड लेकर आप बच सकेंगे?यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल में अनेकों भष्टाचार हुऐ मगर अर्थव्यवस्था तो पटरी पर थी क्योकि देश की अर्थव्यवस्था मनमोहन सिंह के सुरक्षित हाथों में था।आप आरबीआई में एक भी गवर्नर को स्वत्रंत रूप से काम करने नहीं देते, यही वजह है कि सभी काबिल गवर्नर आपको छोडकर चले गए।अब आरबीआई गवर्नर इतिहास के छात्र हैं जो देश की अर्थव्यवस्था को इतिहास बनाकर हीं मानेंगे।

वित्तमंत्री से अर्थव्यवस्था का दूर दूर का कोई नाता नहीं है फिर भी एक आदमी के सनक से वो वित्तमंत्री हैं जो इस गुमान में हमेशा रहता है कि वो जो कर रहा है वही सही है। पीएमओ में दस बीस गुजरात के अफसरों से देश नहीं चलता प्रधानमंत्री जी और न हीं सनक से।आज देश के विभिन्न सेक्टर फेल होने की कगार पर हैं मगर नीरो अनुच्छेद 370,पाकिस्तान की हीं बाँसुरी बजा रहा है और जबतक सबकुछ तबाह नहीं हो जाता उसकी नींद खुलेगी नहीं ये तो तय मानिए।

Post Source : Ajay Srivastava Facebook

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