जब देश का रक्षक हीं भक्षक बन बैठा था

31 अक्टूबर 1984,सुबह साढ़े सात बजे इंदिरा गांधी तैयार हो चुकीं थीं। उनकी सबसे पहली मीटिंग पीटर उस्तीनोव के साथ थी जो इंदिरा गांधी पर एक डाँक्यूमेंट्री बना रहे थे। पीटर उस्तीनोव एक दिन पहले उडीसा दौरे पर भी साथ थे। दोपहर में इंदिरा गांधी को ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री जेम्स कैलेघन और मिजोरम एक एक नेता से मिलना था। शाम को वो ब्रिटेन की राजकुमारी ऐन को भोज देने वाली थीं।
सोनिया गांधी अपनी किताब “राजीव” में लिखती हैं कि जब इंदिरा गांधी उडीसा का दौरा कर दिल्ली लौटीं तो बेहद थकी हुई थीं। उस रात वो बहुत कम सो पाईं थीं। सुबह चार बजे जब मैं अपनी दवा खोज रही थी तो वह मेरे पास आईं और दवा खोजने में मेरी मदद करने लगीं थीं। उन्होंने मुझे कहा कि अगर तुम्हारी तबीयत फिर बिगडे तो मुझे आवाज दे देना, मैं जाग रहीं हूँ।

अपने जिंदगी की आखिरी रात वो ठीक से सो नहीं सकीं, शायद नियति उन्हें सोने से पहले और जिंदगी दिखाना चाहता था। इंदिरा गांधी ने सुबह हल्का नाश्ता किया तभी उनके डाक्टर केपी माथुर आ गए। इंदिरा गांधी का ब्लड प्रेशर वगरह की जाँच की गई जो नार्मल था।घर से बाहर निकलने से पहले रोज डा.माथुर उनके स्वास्थ्य की जाँच करते थे। इंदिरा जी रोज योगा भी करतीं थीं, धीरेंद्र ब्रहमचारी अक्सर उनके बंगले पर योगा सिखाने आते थे।

नौ बजकर दस मिनट पर इंदिरा गांधी केसरिया रंग की साडी पहने जिसका बार्डर काले रंग का था घर से बाहर निकलीं। उन्हें धूप से बचाने के लिए सिपाही नारायण सिंह छाता लगाकर चल रहा था।इंदिरा गांधी से कुछ कदम पीछे आरके धवन थे तो उनसे थोडे हीं पीछे उनके नीजि सेवक नाथूराम थे। सबसे पीछे इंदिरा गांधी के सुरक्षा अधिकारी सब इंस्पेक्टर रामेश्वर दयाल चल रहे थे। इंदिरा गांधी जब एक अकबर रोड को जोडने वाली गेट पर पहुँचीं तभी उनकी सुरक्षा में तैनात बेअंत सिंह ने अपनी सर्विस रिवाल्वर निकालकर उनपर फायर झोंक दिया। गोली उनके पेट में लगी और वो नीचे गिर गईं, फिर बेअंत सिंह ने दो और फायर किए। एक गोली इंदिरा गांधी के सीने और दूसरी कमर में घुस गई।

घटनास्थल के थोडी दूर पर हीं 22 वर्षीय सतवंत सिंह आटोमेटिक कारबाइन के साथ खडा था। उसे भी इंदिरा गांधी पर गोली चलानी थी मगर वो सकते में आ गया था तभी बेअंत सिंह ने चिल्लाते हुए कहा गोली चलाओ। बेअंत सिंह के बोलने पर वह होश में आया और उसने आटोमेटिक कारबाइन की पच्चीस गोलियां इंदिरा गांधी के जिस्म में उतार दिया। इस लौकमहर्षक घटना को देखकर सब इंस्पेक्टर रामेश्वर दयाल भागकर इंदिरा गांधी के पास पहुँचने की कोशिश की मगर सतवंत सिंह ने उन्हें भी गोली मारकर ढेर कर दिया।

इंदिरा गांधी की हत्या कर बेअंत सिंह और सतवंत सिंह ने हथियार डाल दिए और कहा हमें जो करना था कर दिया, अब तुम्हें जो करना है तुम करो। तभी आईटीबीपी के कुछ जवान पास में हीं ड्यूटी कर रहे थे वहाँ आए और दोनों को पकड लिया। दुर्भाग्य देखिए घटना वाले दिन एमबुलेंस भी नहीं था और इंदिरा गांधी ने बुलेटप्रूफ जैकट भी नहीं पहना था। इंदिरा गांधी के सलाहकार माखनलाल फोतेदार, आरके धवन, सुरक्षाकर्मी दिनेश भट्ट बेसुध इंदिरा गांधी को एंबेसडर कार की पिछली सीट पर लादकर एम्स ले जाने लगे। सोनिया गांधी नाईट गाउन में बिना चप्पल कार में एम्स जाने के लिए सवार हो गईं। उन्होंने इंदिरा गांधी के सर को अपने गोद में ले रखा था। कार नौ बजकर 32 मिनट पर एम्स पहुँचीं, गेट से हीं डाक्टरों ने इलाज शुरू कर दिया था। दो बजकर बत्तीस मिनट पर इंदिरा गांधी को मृत घोषित किया गया।

आपको बता दें स्वर्णमंदिर में आँपरेशन ब्लूस्टार से सिख समुदाय इंदिरा गांधी से काफी नाराज था और इसी वजह से कुछ लोगों ने इंदिरा गांधी की हत्या के लिए ये षड्यंत्र रचा था, जिसमें बेअंत सिंह और सतवंत सिंह को पंथ की रक्षा के लिए इंदिरा गांधी की हत्या करने को कहा गया था।खुफिया एजेंसियों ने आशंका जताई थी कि सिख चरमपंथी हमला कर सकते हैं मगर इंदिरा गांधी ने अपनी सुरक्षा में किसी भी सिख को नहीं हटाया था। आज संपूर्ण देश इंदिरा गांधी की शहादत को नमन करता है और आयरन लेडी के दिखाए मार्ग पर चलने का प्रण करता है। आपकी शहादत को देश कभी भुला न पाएगा।

Post Source : Ajay Srivastava Facebook

Show More

Related Articles