पुलिस अधीक्षक खीरी ने निष्पक्ष पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों पर लिखाये फर्जी मुकदमे

भारती प्रेस परिषद से न्याय की मांग


लखीमपुर खीरी। लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ खतरे में,पत्रकारिता की आँड़ में ठग, लूट, बेईमानी सोशल मिडिया पर अश्लील वीडियो डालने में माहिर का गिरोह सक्रिय है। लगभग एक माह पूर्व कोतवाली सदर लखीमपुर के प्रांगण में भूचाल तब आ गया जब एक तथा कथित महिला पत्रकार को महिला सिपाही ने टेलीफोन करके कोतवाली बुलाया था। तथाकथित महिला पत्रकार के कोतवाली पहुंचते ही उक्त महिला सिपाही कम्प्यूटर कक्ष में बैठाकर कहीं चली गयी।कोतवाली पुलिस में पहले से ही गुटबाजी है और एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिये प्रयास रत रहते हैं। इस बीच कोतवाली में तैनात वरिष्ठ दरोगा से किसी पुलिस कर्मी ने कान में कुछ कहा और दरोगा पाण्डेय ने निरीक्षक पान सिंह के पास भेज दिया। निरीक्षक पान सिंह ने कम्प्यूटर कक्ष में बैठी उक्त तथा कथित महिला सुनहरा पत्रकार को बुलाया और परिचय पूँछा। फिर क्या था पूरी कोतवाली में कोहराम मच गया।
तथाकथित महिला पत्रकार ने यह नहीं बताया कि मैं अपने चेले तौहीद को बचाने आई हूँ। जिसने गलती से सोशल मिडिया पर अश्लील बिडियो डाली है। कोतवाली में सरेआम निरीक्षक पान सिंह के काम में बाधा डाली और तूतड़ाक करके अपमानित भी किया था। मामला उस समय बिगड़ गया जब उक्त तथाकथित महिला पत्रकार के गुट के साथी सत्य प्रकास तिवारी, नित्यानंद बाजपेई व नवाब टेलर सहित गुट के समस्त ठग जिन्होंने लखनऊ निवासिनी नीलिमा को लखीमपुर के मोहल्ला काशीनगर में किसी का खाली पड़ा प्लाट दिखाकर साढ़े तीन लाख रुपए ठग लिये थे। उक्त तथा कथित महिला पत्रकार के समर्थन में आ गये। फिर क्या था समाचारों के प्रकाशन होते ही उक्त तथाकथित महिला पत्रकार बौखला गयी।और पुलिस मुखिया को गुमराह करके पत्रकारों के विरुद्ध आईटी एक्ट के तहत कई मुकदमें पंजीकृत करा दिये।
पुलिस मुखिया से सिकायत करने गये वरिष्ठ पत्रकार डाक्टर अखलाक अहमद खां ने कहा कि आपने झूँठे व फर्जी मुकदमे पंजीकृत करा दिये हैं इसकी जांच होनी चाहिए। करीब बीस मिनट की गर्मा गरम बहस में पुलिस मुखिया ने कई धमकियां देते हुये कहा कि मैं कोतवाली सदर प्रभारी को सस्पेंट कर दूंगी। पुलिस मुखिया के रवैये से छुब्ध वरिष्ठ पत्रकार डाक्टर अखलाक अहमद खां ने भरतीय प्रेस परिषद नई दिल्ली भारत सरकार को पत्र भेज कर गुहार लगायी है कि पुलिस मुखिया ने सार्वजनिक तौर पर धमकियां दीं व वरिष्ठ पत्रकार को नुकसान भी पहुंचा सकती हैं।

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